मांगलिक, गोत्र और कुंडली: शादी के बायोडाटा में कैसे लिखें
मांगलिक स्थिति, गोत्र और जन्म कुंडली — ये तीन जानकारियां हिंदू विवाह में सबसे ज़्यादा पूछी जाती हैं। जानें इन्हें बायोडाटा में कैसे और क्यों लिखें।
मांगलिक स्थिति — क्यों और कैसे लिखें?
हिंदू ज्योतिष में मंगल दोष (मांगलिक) एक महत्वपूर्ण विषय है। यदि आपकी कुंडली में मंगल 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में है, तो आप मांगलिक हैं। यह जानकारी बायोडाटा में स्पष्ट रूप से लिखें।
- •मांगलिक — हाँ / नहीं / आंशिक मांगलिक
- •यदि आंशिक हैं तो कौन से भाव में मंगल है — यह ज्योतिषी को बताएं
- •मांगलिक दोष निवारण पूजा हुई है या नहीं
💡 मांगलिक स्थिति कभी न छुपाएं। यह बाद में सामने आती है और रिश्ता टूटने का कारण बनती है। कई परिवार मांगलिक रिश्ते सहर्ष स्वीकार करते हैं — बशर्ते पहले से बताया जाए।
गोत्र — क्यों ज़रूरी है?
गोत्र वह ऋषि वंश है जिससे आपका परिवार संबंधित है। हिंदू परंपरा में एक ही गोत्र में विवाह नहीं होता (सपिंड विवाह वर्जित)। इसलिए दोनों परिवारों का गोत्र अलग होना जरूरी है। अपना गोत्र सही-सही लिखें — भरद्वाज, कश्यप, वशिष्ठ, कौशिक आदि।
कुंडली की जानकारी
- •जन्म तिथि — दिन, महीना, वर्ष
- •जन्म समय — घंटे और मिनट में, AM/PM स्पष्ट करें
- •जन्म स्थान — शहर और राज्य (ज्योतिषी इसका उपयोग करते हैं)
- •राशि — मेष, वृष, मिथुन आदि
- •नक्षत्र — अश्विनी, भरणी आदि
यदि आपके पास जन्म कुंडली की PDF है, तो उसे बायोडाटा के साथ अलग से भेजें। बायोडाटा में केवल मूल जानकारी — राशि, नक्षत्र, और मांगलिक स्थिति — लिखें। पूरी कुंडली बाद में साझा करें।
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